01:15 AM, गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 | तिथि:पापांकुशा एकादशी (2:48 PM तक), शुक्ल पक्ष, आश्विन | नक्षत्र:शतभिषा | राहु काल:01:30 PM - 02:55 PM | सूर्योदय:06:26 AM | सूर्यास्त:05:44 PM

धन्वन्तरि जी की आरती

धन्वन्तरि जी की आरती

संक्षिप्त सार (Summary)

धनतेरस का अर्थ सिर्फ धन खरीदना नहीं है। परंपरा में इसे "धन्वंतरि त्रयोदशी" भी कहा जाता है, दीपावली से पहले धनतेरस पूजा के दिन आरोग्य के देवता कहे जाने वाले भगवान श्री धन्वंतरि जी की पूजा और आरती की जाती है। इसके बाद दिवाली की रात माँ लक्ष्मी की आरती की जाती है।

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॥ आरती श्री धन्वन्तरि जी की ॥

जय धन्वन्तरि देवा,

जय धन्वन्तरि जी देवा।

जरा-रोग से पीड़ित

जन-जन सुख देवा॥

जय धन्वन्तरि देवा...॥

तुम समुद्र से निकले,

अमृत कलश लिए।

देवासुर के संकट

आकर दूर किए॥

जय धन्वन्तरि देवा...॥

आयुर्वेद बनाया,

जग में फैलाया।

सदा स्वस्थ रहने का,

साधन बतलाया॥

जय धन्वन्तरि देवा...॥

भुजा चार अति सुन्दर,

शंख सुधा धारी।

आयुर्वेद वनस्पति से

शोभा भारी॥

जय धन्वन्तरि देवा...॥

तुम को जो नित ध्यावे,

रोग नहीं आवे।

असाध्य रोग भी उसका,

निश्चय मिट जावे॥

जय धन्वन्तरि देवा...॥

हाथ जोड़कर प्रभुजी,

दास खड़ा तेरा

वैद्य-समाज तुम्हारे

चरणों का घेरा॥

जय धन्वन्तरि देवा...॥

धन्वन्तरिजी की आरती

जो कोई नर गावे।

रोग-शोक न आए,

सुख-समृद्धि पावे॥

जय धन्वन्तरि देवा...॥



आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि जी जिन्हें भगवान विष्णु का अंशावतार कहा जाता है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को समुद्र मंथन में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसीलिए उन्हें आरोग्य और दीर्घायु का देवता माना जाता है और धनतेरस पूजा होती है। दीपावली की रात माता लक्ष्मी की आरती के साथ समृद्धि का स्वागत किया जाता है, और इस तरह दीपावली के उत्सव की शुरुआत स्वास्थ्य की पूजा से होती है।

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