11:58 AM, सोमवार, 31 अगस्त 2026 | तिथि:तृतीया (8:51 AM तक), चतुर्थी, कृष्ण पक्ष, भाद्रपद | नक्षत्र:रेवती | राहु काल:07:34 AM - 09:10 AM | सूर्योदय:05:58 AM | सूर्यास्त:06:43 PM

अम्बे माँ की आरती

अम्बे आरती

संक्षिप्त सार (Summary)

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली यह अम्बे माँ की आरती दुर्गा माता को ही समर्पित है। नवरात्रि और दुर्गा पूजा में इसका विशेष महत्व है, और भक्त इसे रोज़ाना पूजा में भी गाते हैं।

Font Size:

माँ अम्बे जी की आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली

तेरे ही गुण गावें भारती

ओ मैया... हम सब उतारे तेरी आरती॥x2

तेरे भक्त जनो पर माता, भीड़ पड़ी है भारी।

दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥

सौ-सौ सिहों से तु बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली,

दुष्टों को पल में संहारती।

ओ मैया... हम सब उतारे तेरी आरती॥x2

माँ-बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता।

पूत-कपूत सुने है पर ना, माता सुनी कुमाता॥

सब पे करूणा बरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली,

दुखियों के दुखड़े निवारती।

ओ मैया... हम सब उतारे तेरी आरती॥x2

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।

हम तो मांगें माँ तेरे मन में, एक छोटा सा कोना॥

सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,

सतियों के सत को संवारती।

ओ मैया... हम सब उतारे तेरी आरती॥x2

चरण शरण में खड़े तुम्हारी,ले पूजा की थाली।

वरद हस्त सर पर रख दो माँ, संकट हरने वाली॥

माँ भर दो भक्ति रस प्याली,अष्ट भुजाओं वाली,

भक्तों के कारज तू ही, सारती।

ओ मैया... हम सब उतारे तेरी आरती॥


नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन माँ दुर्गा के अलग रूप की पूजा होती है, और आरती के साथ-साथ दुर्गा चालीसानौ देवियों के मंत्र का पाठ भी परंपरागत रूप से किया जाता है। कई क्षेत्रों में भक्त दुर्गा माता की आरती भी साथ में गाते हैं, क्योंकि दोनों आरतियाँ माँ के अलग-अलग स्वरूपों की महिमा बताती हैं।


शेयर करें:

क्या आप ये जानते है (FAQ)

सुबह-शाम दोनों समय की जा सकती है। नवरात्रि और दुर्गा अष्टमी पर इसका विशेष महत्व है, पर भक्त इसे रोज़ भी करते हैं।

मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है, मन को शांति मिलती है और नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं।

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, और हर दिन की आरती के अंत में यह आरती गाई जाती है। इसे विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है।

दीपक जलाकर, फूल और अगरबत्ती अर्पित करके माँ दुर्गा की मूर्ति के सामने आरती की थाली को घुमाते हुए श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ।

अगर समय हो तो दुर्गा चालीसा, दुर्गा मंत्र और दुर्गा माता की आरती का पाठ साथ में करना और भी फलदायी माना जाता है।