10:15 AM, बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 | तिथि:दशमी (2:12 PM तक), शुक्ल पक्ष, आश्विन | नक्षत्र:धनिष्ठा | राहु काल:12:05 PM - 01:30 PM | सूर्योदय:06:25 AM | सूर्यास्त:05:45 PM

दुर्गा आरती

दुर्गा आरती

संक्षिप्त सार (Summary)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी

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दुर्गा आरती 

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

जय अम्बे गौरी

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रबदन नीको ॥

जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥

जय अम्बे गौरी

केहरि वाहन राजत ,खड्ग खप्पर धारी।

सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःख हारी ॥

जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति ॥

जय अम्बे गौरी

शुम्भ-निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती ॥

जय अम्बे गौरी

चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु कैटभ दोउ मारे ,सुर भयहीन करे ॥

जय अम्बे गौरी

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥

जय अम्बे गौरी

चौंसठ योगिनि मंगल गावत, नृत्य करत भैरू।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥

जय अम्बे गौरी

तुम हो जग की माता, तुम ही हो भर्ता ।

भक्तन की दु:ख हर्ता, सुख सम्पति कर्ता ॥

जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी ।

मनवांछित फल पावत ,सेवत नर नारी ॥

जय अम्बे गौरी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ॥

जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै ॥

जय अम्बे गौरी


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