शिव मंत्र
1. ॐ नमः शिवाय।
शिव जी का सबसे प्रसिद्ध "पंचाक्षर मंत्र" (5 अक्षर वाला)। रोज़ाना जपने से मानसिक शांति मिलती है, सबसे सरल और सबसे ज़्यादा जपा जाने वाला मंत्र है।
2. ॐ त्र्यंम्बकम् यजामहे, सुगन्धिपुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।
इसे **"महामृत्युंजय मंत्र"** कहते हैं। दीर्घायु, आरोग्य और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए जपा जाता है। महाशिवरात्रि और सावन में इसका विशेष महत्व है।
3. ॐ ऐं ह्रीं शिव गौरीमय ह्रीं ऐं ऊं।
शिव-गौरी का "बीज मंत्र" (तांत्रिक/दांपत्य सुख के लिए जपा जाता है, शिव-पार्वती के संयुक्त रूप का आह्वान करता है)।
4. नमो नीलकण्ठाय।
शिव को "नीलकंठ" नाम से नमन, जब उन्होंने समुद्र मंथन के विष को अपने कंठ में धारण किया था।
5. ॐ पार्वतीपतये नमः।
पार्वती के पति (शिव) को नमन — सद्गृहस्थ जीवन और सुहाग की कामना के लिए जपा जाता है।
6. ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।
शिव का एक और "बीज मंत्र रूप", तांत्रिक पूजा में शक्ति-जागरण के लिए उपयोग होता है।
7. ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा
"दक्षिणामूर्ति मंत्र", ज्ञान और बुद्धि (मेधा) के लिए जपा जाता है — विद्यार्थी खासकर इसका जाप करते हैं।
8. ऊर्ध्व भू फट्
एक 'तांत्रिक बीज मंत्र', रक्षा कवच के रूप में उपयोग होता है।
9. इं क्षं मं औं अं
"बीज अक्षर श्रृंखला" (तांत्रिक), शिव साधना के एक हिस्से के रूप में जपा जाता है।
10. ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्।
महामृत्युंजय मंत्र का "तांत्रिक/बीज-युक्त विस्तृत रूप", नेत्र तर्पण और विशेष साधना में उपयोग होता है।
11. ऊँ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय
च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।
तव तत्वं न जानामि कीदृशोऽसि महेश्वर।
यादशोसि महादेव तादृशाय नमोनम:॥.
यह "श्री रुद्रम्" (नमकम्) का हिस्सा है, वैदिक पाठ में शांति और कल्याण के लिए जपा जाता है।
12. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात
"रुद्र गायत्री मंत्र", बुद्धि और प्रज्ञा के लिए रोज़ाना जपा जाता है।
13. जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
यह "शिव तांडव स्तोत्र" का पहला श्लोक है, जो रावण ने रचा था जब शिव ने अपने पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत को दबाया था (रावण की शक्ति के अहंकार को तोड़ने के लिए)।
14. नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
यह "शिव पंचाक्षर स्तोत्र" (आदि शंकराचार्य रचित) का पहला श्लोक है — "पंचाक्षर मंत्र" (न-म-शि-वा-य) के हर अक्षर की महिमा बताता है।
15. कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि ।।
यह प्रसिद्ध **श्लोक है जो शिव आरती के अंत में गाया जाता है — शिव को "कर्पूर जैसा गोरा, करुणा के अवतार" के रूप में नमन करता है, साथ में पार्वती (भवानी) का भी उल्लेख है।