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गणेश जी की आरती

गणेश आरती

संक्षिप्त सार (Summary)

भगवान श्री गणेश हिंदू धर्म में प्रथम पूजे जाने वाले (सब कामों से पहले) देवता हैं। वे भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं, तथा इनकी दो पत्नियां हैं रिद्धि-सिद्धि और इनके दो पुत्र हैं—शुभ और लाभ। इनका मस्तक हाथी का होने के कारण इन्हें 'गजानन' और दुखों व बाधाओं को दूर करने के कारण 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है। अपनी बुद्धि और माता-पिता की भक्ति के बल पर इन्हें सबसे पहले पूजे जाने का वरदान मिला। महाभारत ग्रंथ भी गणेश जी द्वारा ही लिखा गया था। भाद्रपद माह में मनाया जाने वाला गणेशोत्सव इनका सबसे प्रमुख त्यौहार है।

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गणेश आरती 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी

मस्तक पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा

लड्डुअन का भोग लगे सन्त करे सेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

अँधे को आँख देत कोढ़िन को काया

बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा


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क्या आप ये जानते है (FAQ)

गणेश जी शिव-पार्वती के पुत्र, बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं। किसी भी पूजा या नए कार्य की शुरुआत में सबसे पहले इन्हीं की पूजा की जाती है।

जब संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करने की प्रतियोगिता हुई, तब गणेश जी ने अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) को ही पूरा ब्रह्मांड मानकर उनकी परिक्रमा की। उनकी इस बुद्धिमत्ता और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें सबसे पहले पूजे जाने का वरदान दिया।

पौराणिक कथा के अनुसार, जब गणेश जी ने भगवान शिव को माता पार्वती के भवन में प्रवेश करने से रोका, तब क्रोध में आकर शिव जी ने उनका शीश काट दिया था। बाद में माता पार्वती के हठ पर शिव जी ने एक गज (हाथी) का मस्तक लगाकर उन्हें पुनः जीवित किया।

गणेश जी को 21 दुर्वा (दूध घास), मोदक या बेसन के लड्डू, और लाल फूल अति प्रिय हैं।

महाभारत ग्रंथ लिखते समय जब गणेश जी की कलम टूट गई थी, तो उन्होंने बिना रुके अपने एक दांत को तोड़कर उससे पूरा ग्रंथ लिखा था। इसके अलावा परशुराम जी के फरसे से भी उनका एक दांत टूट गया था, इसलिए उन्हें 'एकदंत' कहा जाता है।