02:32 AM, गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 | तिथि:पापांकुशा एकादशी (2:48 PM तक), शुक्ल पक्ष, आश्विन | नक्षत्र:शतभिषा | राहु काल:01:30 PM - 02:55 PM | सूर्योदय:06:26 AM | सूर्यास्त:05:44 PM

गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्त समय 2026

संक्षिप्त सार (Summary)

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है। जानिए गोवर्धन पूजा की विधि, श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की कथा, अन्नकूट का भोग और पूजा का शुभ मुहूर्त।

गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्त समय 2026

इस वर्ष गोवर्धन पूजा
बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 बुधवार, कार्तिक-शुक्ल-द्वितीया, २०२५
राहुकाल
12:05 PM – 1:30 PM
* यहाँ सभी समय नई दिल्ली स्थान आधारित है
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गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का भोग

दीपावली के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ माता के पूजन का है। ब्रज में इसे बड़े उत्सव की तरह मनाया जाता है, जहाँ घर-घर आँगन में गोवर्धन महाराज की आकृति बनाई जाती है।

गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?

मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने इसी दिन ब्रजवासियों को इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा के लिए प्रेरित किया था। जब इंद्र ने क्रोध में मूसलाधार वर्षा की, तब प्रभु ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उँगली पर उठाकर पूरे ब्रज की रक्षा की। उसी स्मृति में हर वर्ष यह पर्व मनाया जाता है।

गोवर्धन पूजा की कथा

द्वापर युग में ब्रजवासी हर वर्ष देवराज इंद्र की पूजा करते थे, ताकि समय पर वर्षा हो। बालक कृष्ण ने नंद बाबा और गोप-गोपियों से कहा कि हमारी गायों को चारा, फल और जल गोवर्धन पर्वत से मिलता है, इसलिए पूजा का सच्चा अधिकार इस पर्वत का है। ब्रजवासियों ने श्रीकृष्ण की बात मानी और इंद्र की जगह गोवर्धन की पूजा की।

इससे इंद्र को अपने पद का अभिमान चोट खा गया। उन्होंने क्रोधित होकर ब्रज पर प्रलयकारी बादल भेज दिए। लगातार सात दिन और सात रात तक मूसलाधार वर्षा होती रही। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया और सारे ब्रजवासी, गायें और बछड़े उसकी छाया में सुरक्षित रहे। अंत में इंद्र का अभिमान टूट गया और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा माँगी। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा चली आ रही है।

पूजा सामग्री

  • गाय का गोबर
  • रोली, हल्दी, चावल
  • धूप, दीपक और घी
  • फूल और फूलों की माला
  • दूध, दही, शहद और गंगाजल
  • खील-बताशे और मिठाई
  • अन्नकूट के लिए बने विभिन्न पकवान
  • गन्ना और मौसमी फल

गोवर्धन पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान करके घर के आँगन या पूजा स्थान को स्वच्छ करें।

गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ। इसे लेटे हुए पुरुष के रूप में भी बनाया जाता है। साथ में ग्वाल-बाल, गायें और पेड़-पौधे भी बनाए जाते हैं।

आकृति के बीच में दीपक रखें और उसे फूल, गन्ने और सजावट से सजाएँ।

रोली, चावल, फूल, धूप और दीप से गोवर्धन महाराज का पूजन करें।

दूध, दही, शहद और गंगाजल अर्पित करें।

अन्नकूट का भोग लगाएँ।

गोवर्धन महाराज की सात बार परिक्रमा करें और जल की धारा छोड़ते चलें।

पूजन के अंत में गोवर्धन महाराज की आरती करें और सबमें प्रसाद बाँटें।

इस दिन गाय, बैल और बछड़ों को स्नान कराकर सजाया जाता है और उन्हें गुड़ व हरा चारा खिलाया जाता है।

अन्नकूट और 56 भोग

अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पर्वत। इस दिन घरों और मंदिरों में तरह-तरह के पकवान, सब्जियाँ, कढ़ी-चावल, पूड़ी, मिठाइयाँ और मौसमी फल बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है। इन्हें पर्वत के आकार में सजाया जाता है। मंदिरों में 56 प्रकार के भोग अर्पित करने की परंपरा भी है, जिन्हें छप्पन भोग कहा जाता है। नाथद्वारा और मथुरा-वृंदावन के अन्नकूट दर्शन बहुत प्रसिद्ध हैं।

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त

गोवर्धन पूजा प्रतिपदा तिथि में की जाती है, और इसका सबसे शुभ समय प्रातःकाल या सायंकाल माना जाता है।

अलग-अलग क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा

ब्रज, मथुरा और वृंदावन में इस दिन गिरिराज जी की परिक्रमा और अन्नकूट के भव्य आयोजन होते हैं। नाथद्वारा में श्रीनाथ जी को विशाल अन्नकूट का भोग लगता है। गुजरात में यही दिन विक्रम संवत का नववर्ष है, जिसे बेस्तु वरस कहा जाता है। महाराष्ट्र में इसे बलि प्रतिपदा और पाड़वा के रूप में मनाया जाता है।

गोवर्धन पूजा पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

गाय की सेवा करें और उन्हें भोजन कराएँ।

गोवर्धन महाराज का पूजन और परिक्रमा करें।

अन्नकूट का भोग लगाकर प्रसाद बाँटें।

ज़रूरतमंदों को भोजन कराएँ।

क्या न करें (परंपरा के अनुसार):

इस दिन अन्न का अपमान या बर्बादी न करें।

गाय या किसी पशु को कष्ट न दें।

क्रोध और कटु वचन से बचें।

पूजा से पहले भोजन न करें।


गिरिराज गोवर्धन ब्रज की पहचान हैं। श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर इसी पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों को आश्रय दिया था। आज भी भक्त गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं और अन्नकूट में प्रभु को भोग अर्पित करते हैं।

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क्या आप ये जानते है (FAQ)

श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र का अभिमान तोड़ने और गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की स्मृति में यह पूजा की जाती है।

गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है, साथ में ग्वाल-बाल, गायें और पेड़-पौधे भी बनाए जाते हैं।

अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पर्वत। इस दिन भगवान को अनेक प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है।