11:21 AM, बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 | तिथि:दशमी (2:12 PM तक), शुक्ल पक्ष, आश्विन | नक्षत्र:धनिष्ठा | राहु काल:12:05 PM - 01:30 PM | सूर्योदय:06:25 AM | सूर्यास्त:05:45 PM

धनतेरस पूजा विधि 2026

धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या न खरीदें? पूजा विधि | Octas Mantra

संक्षिप्त सार (Summary)

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी का दिन धनतेरस है। जानिए इस दिन धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा कैसे करें, क्या खरीदें और यमदीप कब जलाएँ।

धनतेरस पूजा विधि 2026

इस वर्ष धनतेरस
शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 शनिवार, कार्तिक-कृष्ण-चतुर्दशी, २०२५
पूजा करने का शुभ मुहूर्त
Dhanteras: 4:18 PM – 7:18 PM सायं: ४:१८ PM - ७:१८ PM
राहुकाल
9:14 AM – 10:40 AM
* यहाँ सभी समय नई दिल्ली स्थान आधारित है
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धनतेरस 2026 पर क्या करें: पूजा विधि, खरीदारी और धन्वंतरि-कुबेर पूजन का सही तरीका


धनतेरस का महत्व

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाया जाता है, और इसी दिन से दीपावली के पाँच दिन के उत्सव की शुरुआत होती है। मान्यता है कि समुद्र मंथन में इसी तिथि पर भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए यह दिन सिर्फ धन का नहीं, अच्छे स्वास्थ्य का भी पर्व है। कहावत भी है, पहला सुख निरोगी काया।

पूजा विधि

शाम को घर की सफाई करके मुख्य द्वार पर रंगोली और तोरण सजाएँ।

प्रदोष काल में पूजा की चौकी पर भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी और कुबेर देव की मूर्ति या चित्र रखें।

दीपक जलाकर रोली, चावल, पुष्प और मिठाई अर्पित करें।

नए खरीदे बर्तन या सिक्के की पूजा करें।

"ॐ धन्वंतरये नमः" और "ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः" का जाप करें।

अंत में आरती करके प्रसाद बाँटें।

क्या खरीदें

परंपरा के अनुसार इस दिन पीतल, चाँदी, तांबे के बर्तन, सोने-चाँदी के सिक्के, झाड़ू, धनिया के बीज और गोमती चक्र खरीदना शुभ माना जाता है। खरीदारी अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें। श्रद्धा और भाव ही असली पूँजी है।

क्या न खरीदें

परंपरा के अनुसार धनतेरस पर लोहे का सामान, स्टील के तेज़ धार वाले बर्तन, चाकू-कैंची जैसी नुकीली चीज़ें और काँच का सामान खरीदने से बचा जाता है। कुछ लोग काले रंग की वस्तुएँ और खाली बर्तन घर लाने से भी परहेज़ करते हैं। खाली बर्तन खरीदें तो उसमें कुछ अन्न, जल या मिठाई भरकर ही घर लाएँ। ये सब लोक-मान्यताएँ हैं, इसलिए अपने परिवार की परंपरा के अनुसार चलें।

यमदीप दान

संध्या के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके चौमुखा दीपक जलाया जाता है। इसे अकाल मृत्यु के भय से रक्षा के लिए किया जाता है। पुरानी कथा में राजा हिम के पुत्र की रक्षा दीपों की रोशनी और आभूषणों की चमक से हुई थी।

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